गोनू झा 13 वीं शताब्दी में मिथिला के राजा हरि सिंह के समकालीन हाजिर जवाब थे। उनका जन्म दरभंगा जिले के एक गाँव “भरवारा ” में हुआ था। । उनके बारे में कई विनोदी मैथिली भाषा की लोककथाएँ हैं, जो उन्हें एक मजाकिया और बुद्धिमान व्यक्ति के रूप में दर्शाती हैं।

गोनू झा की चालाकी के किस्से तो मिथिलांचल क्या, अगल-बगल के एरिया में भी सौ साल से प्रचलित हैं. गोनू झा कोई स्कूल -कालिज के पढ़े नहीं थे.वो तो मिथिला के एक सीधा-सादा किसान थे, लेकिन हाजिरजवाबी और चतुराई में बड़के विद्वानों को धूल फंका देते थे. उनके यही टैलेंट देखकर मिथिला के राजा ने उनको अपने दरबार में नौकरी दे दी.

उनके किस्से इत्ते फेमस हैं कि वहां के लोगों को मुंह-जुबानी याद हैं. मिथिला नरेश के दरबारी गोनू झा का जलवा बिल्कुल वैसा ही था, जैसा अकबर के दरबार में बीरबल का.|

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