महात्मा गाँधी ने चम्पारण सत्याग्रह आंदोलन का नेतृत्व कैसे किया

mahama gandhi and champaran satyagraha movement

महात्मा गाँधी ने देश के लिए बहुत सारे आंदोलनों का नेतृत्व किया ये जगजाहिर है|लेकिन उनके आंदोलनों की शुरुआत जहां से हुई थी वो गौरवमयी स्थान ,बिहार का  चम्पारण (मोतिहारी)  है |उस आंदोलन को लोग असहयोग आंदोलन के नाम से जानते हैं |आइये जाने इस आंदोलन को ,की कैसे गाँधी जी ने इस आंदोलन में कैसे किसानो का साथ दिया और इस आंदोलन से देशवासियो को क्या मिला |

बात उन दिनों की है जब अंग्रेजो ने अपने फायदे के लिए किसानो पर जुल्म करना शुरू किया था

बिहार के उत्तर पश्चिमी गांव चंपारण के किसानों को उनके खाद्य पदार्थों जो उनके जीवन यापन के लिए आवश्यक थे के बजाय यूरोपीय पौधों द्वारा नीलों को बढ़ाना पड़ता था,। नील भूमि की उत्पादकता को नष्ट कर रहा था जो किसान के विरोध का मुख्य कारण था।

गांधीजी ने किसानों के कारणों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना और चंपारण आंदोलन की शुरुआत की।

विशेषताएं:

1. सच्चाई पर जोर

2. अतीत में किसानों द्वारा हिंसक बगावत के साथ विरोधाभास में एक अहिंसक और शांतिपूर्ण आंदोलन।

3. एक प्रेरक रणनीति के आधार पर।

प्रासंगिकता:

उस समय (1 9 10 के दशक) जब ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों /किसानो के किसी भी लोकप्रिय भावना / असंतोष / विरोध को कुचल दिया जाता था , उसके विपरीत चंपारण आंदोलन में शांति और अनुनय की रणनीति बेहद प्रासंगिक थी क्योंकि इसने अंग्रेजों को आंदोलन को कुचलने के लिए कोई आधार नहीं दिया था ।

महत्व और इस आंदोलन का प्रभाव 

1.यूरोपीय बागानियों ने इस क्षेत्र के गरीब किसानों के लिए खेती पर और अधिक मुआवजा और नियंत्रण देने पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और अकाल समाप्त होने तक राजस्व वृद्धि और रद्दीकरण रद्द कर दिया।

2. गाँधी जी ने इस सत्याग्रह के बाद भारत की स्वतंत्रता संग्राम में एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में सत्याग्रह का उपोग किया।

3. इस सत्याग्रह का मनोवैज्ञानिक प्रभाव लोगो पर कमाल का था था। वो लोग यानि पीड़ित लोग सत्य और अहिंसा में विश्वास करने लगे थे ।

चंपारण सत्याग्रह का प्रतीकात्मक महत्व यह था- – सफलता भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन की अगली सीट पर गांधी को रखने और सत्याग्रह के लिए असैनिक प्रतिरोध का एक शक्तिशाली उपकरण बनाने के लिए जिम्मेदार साबित हुआ।कुल मिलकर कहा जाये तो चम्पारण के इस आंदोलन ने लोगो में जान फूंक दी और गांधीजी ने शांति और अहिंसा को अपना हथिआर बनाकर आगे की लड़ाई लड़ी

अतुल्य बिहार की और से उनके दिवंगत आत्मा को कोटि- कोटि प्रणाम

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