shikha surabhi

यह वास्तव में कहा गया है कि यदि आपके पास अपने लक्ष्य को पाने की चाह , साहस और समर्पण है, तो आप अपने लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त करेंगे, चाहे उस में कितना भी समय लगे।

यह कहावत कैप्टन शिखा सुरभि के मामले में पूरी तरह फिट बैठती है। बिहार की इस बेटी ने फेमस इंडियन आर्मी कॉर्प्स ऑफ़ सिग्नल का हिस्सा बनने वाली पहली महिला बनकर हमें गौरवान्वित किया ।

दरअसल डेयरडेविल्स टीम वो टीम है जिसने गणतंत्र दिवस परेड में जो मोटरबाइक्स पर नेल-बंटिंग स्टंट दिखाया । जब डेयरडेविल्स, सिग्नल कोर डिवीजन की टीम आश्चर्यजनक बाइक स्टंटकर रही थी उस टीम में कप्तान, शिखा सिंह भी शामिल थी और इसी होनहार निडर लड़की ने बाइक पर खड़े होकर तिरंगे को सलामी दी। उसने इस दिन के लिए वास्तव में कड़ी मेहनत की है वह परेड के लिए घंटों अभ्यास करती थी।

कौन है सुरभि

शिखा सुरभि बक्सर जिले के छोटका राजपुर गाँव से सम्बन्ध रखती हैं और शैलेंद्र सिंह की बेटी हैं। वर्तमान में पंजाब के भटिंडा में वह भारतीय सेना के सिग्नल कोर डिवीजन के लिए काम कर रही हैं। जब उसका परिवार डुमराव में रहता था, तो वह अपनी कॉलोनी की अन्य लड़कियों को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करती थी। वह अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। उसका छोटा भाई बंबई में है और उसकी बहन हजारीबाग से इंटरमीडिएट कर रही है जहाँ उसका परिवार अब रहता है। उनकी मां शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में शिक्षिका हैं, जबकि उनके पिता शैलेंद्र सिंह भारतीय जीवन बीमा निगम में एक एजेंट हैं। शिखा को अपने जीवन के शुरुआती चरण से ही भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया था क्योंकि उनके मातृ परिवार की सेना की पृष्ठभूमि है और उनके कई रिश्तेदार भारतीय सेना में हैं।

कर चुकी है इंजीनियरिंग की पढ़ाई

जयपुर इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर साइंस स्ट्रीम में बीटेक पूरा करने के बाद शिखा ने यूनिवर्सिटी एंट्री स्कीम के जरिए भारतीय सेना में प्रवेश किया है। shikha ने उत्कृष्ट प्रदर्शन और उच्च अंकों के कारण, उन्हें भारतीय सेना की विश्वविद्यालय प्रवेश योजना के एसएसबी साक्षात्कार के लिए चुना गया था। 2013 में एक कठोर साक्षात्कार के माध्यम से वह एक सेना अधिकारी बन गई और अपनी क्षमताओं के कारण वह डेयरडेविल्स टीम का हिस्सा बन गई।

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