Friday, May 24, 2024
HomeNewsखुशखबरी: बिहार का मशहूर शाही लीची को मिला गुणवत्ता का...

खुशखबरी: बिहार का मशहूर शाही लीची को मिला गुणवत्ता का टैग

Published on

आमतौर पर कहा जाता है कि किसी भी चीज की पहचान बनाना बहुत ही खुशी का क्षण होता है । अभी मैं जो खबर सुनाने जा रहा हु ये सुनके सभी बिहारी खासकर मुजफ्फरपुर वासियों का दिल बाग़ बाग़ हो जायेगा । दरअसल बिहार की शाही लिची को भी एक नई पहचान मिली जब इसे भौगोलिक संकेत टैग से सम्मानित किया गया। भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग भारत पेटेंट कार्यालय द्वारा दिया जाता है और यह गुणवत्ता और विशिष्टता का पहचान होता है ।

 विकास जायसवाल: बिहारी उद्यमी और बहुचर्चित लूडो किंग गेम के रचयिता

शाही लिची अपने मीठे, रसदार अद्वितीय स्वाद और सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। यह ज्यादातर मुजफ्फरपुर और पूर्वी चंपारण, वैशाली, समस्तीपुर और बेगूसराय के पड़ोसी जिलों में उगाया जाता है। पंजीकरण प्रक्रिया के शुरू होने के एक वर्ष से बाद इस सदाबहार लीची को जीआई टैग से सम्मानित किया गया है। प्रक्रिया पूरी करने के बाद, उत्पाद के विवरण भारत सरकार के भौगोलिक इंडिकेशन पत्रिका में पेटेंट अधिकारों के तहत प्रकाशित किए गए थे
बिहार कृषि विश्वविद्यालय ,सबौर  के निदेशक आर के लोहेन ने पुष्टि की, की लीची को इस सम्मानित टैग से नवाजा गया थाऔर इसके खिलाफ किसी ने कोई ऑब्जेक्शन नहीं किया था “। राष्ट्रीय शोध केंद्र के निदेशक विशाल नाथ, ने बताया की ये हमारे लिए एक बहुप्रतीक्ष और उत्साहवर्धक खबर थी ।

लिची एसोसिएशन ऑफ बिहार के अध्यक्ष बाचा प्रसाद सिंह ने कहा की मूल रूप से एप्लाइड टैग के लिए अप्लाई लिची एसोसिएशन ऑफ बिहार ने किया था ।

जीआई टैग से जुड़े तथ्य और इसके फायदे

  • जीआई टैग से लीची उत्पादकों को बेहतर कीमत मिलने से लेकर दूर दूर के बाजारों तक पहुंच प्रदान करने का लाभ मिलेगा
  • इससे दूरदराज के इलाकों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भरी लाभ होगा।
  • यह टैग 10 साल की अवधि के लिए मान्य है जिसके बाद इसे नवीनीकृत किया जा सकता है, जीआई को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के एक कानून द्वारा कवर किया गया है

बिहार के लिची ग्रोर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बिहार प्रसाद सिंह,ने कहा, “टैग, बंगाल, उत्तराखंड और पंजाब जैसे अन्य राज्यों के लिची उत्पादकों पर एक प्रभावी जांच करेगा,” श्री सिंह ने कहा, “अब बिहार लिची उत्पादकों को शाही लिची बाजार का एकमात्र अधिकार मिलेगा और इससे निश्चित रूप से उन्हें उनके उत्पाद के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। ”

अभी तक बिहार के कौन कौन से उत्पाद को जी आई टैग मिला है

इस टैग से सम्मानित बिहार के अन्य उत्पाद  है 

  • जर्डलु आम
  • कतरनी  चावल
  • मगही पान
  • मधुबनी पेंटिंग्स
  • भागलपुर सिल्क
  • सिक्की घास

आपको बता दे की दार्जिलिंग चाय 2004 के वर्ष में जीआई टैग प्राप्त करने वाला पहला उत्पाद था।

क्या आपके पास है बिहार से जुड़ा कोई दिलचस्प किस्सा तो हमें लिखे साझा करने के लिए कृपया                          [email protected] पर हमें लिखें, या फेसबुक और ट्विटर या  इंस्टाग्राम  पर हमसे जुड़ें।

Facebook Comments

Latest articles

खगड़िया जिला स्थापना दिवस : मक्का और दूध का अद्भुत उत्पादन करता है यह ज़िला

बिहार के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित खगड़िया जिला ने अपने 44वें वर्ष में प्रवेश...

राजगीर का शायक्लोपिएन दीवार

राजगीर में स्थित शायक्लोपिएन दीवार ( चक्रवात की दीवार) मूल रूप से चार मीटर...

बिहार के तीसरे चरण के लोकसभा चुनाव में पांच सीटों के समीकरण

बिहार के तीसरे चरण के लोकसभा चुनाव में पांच सीटों के समीकरण इस प्रकार...

सिलाई मशीन योजना ऑनलाइन आवेदन 2024: महिला सशक्तिकरण के लिए मुफ्त सिलाई मशीन योजना

क्या है सिलाई मशीन योजना ? भारत सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य...

More like this

पटना मेट्रो: सातवें आसमान में उड़ान का इंतजार

पटना मेट्रो का निर्माण: एक सुरक्षित और तेज़ यातायात की ओर राजधानी पटना में मेट्रो...

पटना विश्वविद्यालय का नाम दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी पर पहुँचाया मिताली प्रसाद ने

हौसला इंसान से उनके सपने पूरे कराने का माद्दा रखता है।कुछ ऐसा ही कारनामा...

बिहार की अंजलि ने किया कमाल, बनी विदेश में तैनात होने वाली पहली महिला विंग कमांडर

लड़कियां हमेशा देश का मान बढाती है, एक बार फिर बिहार ...