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आमतौर पर कहा जाता है कि किसी भी चीज की पहचान बनाना बहुत ही खुशी का क्षण होता है । अभी मैं जो खबर सुनाने जा रहा हु ये सुनके सभी बिहारी खासकर मुजफ्फरपुर वासियों का दिल बाग़ बाग़ हो जायेगा । दरअसल बिहार की शाही लिची को भी एक नई पहचान मिली जब इसे भौगोलिक संकेत टैग से सम्मानित किया गया। भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग भारत पेटेंट कार्यालय द्वारा दिया जाता है और यह गुणवत्ता और विशिष्टता का पहचान होता है ।

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शाही लिची अपने मीठे, रसदार अद्वितीय स्वाद और सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। यह ज्यादातर मुजफ्फरपुर और पूर्वी चंपारण, वैशाली, समस्तीपुर और बेगूसराय के पड़ोसी जिलों में उगाया जाता है। पंजीकरण प्रक्रिया के शुरू होने के एक वर्ष से बाद इस सदाबहार लीची को जीआई टैग से सम्मानित किया गया है। प्रक्रिया पूरी करने के बाद, उत्पाद के विवरण भारत सरकार के भौगोलिक इंडिकेशन पत्रिका में पेटेंट अधिकारों के तहत प्रकाशित किए गए थे
बिहार कृषि विश्वविद्यालय ,सबौर  के निदेशक आर के लोहेन ने पुष्टि की, की लीची को इस सम्मानित टैग से नवाजा गया थाऔर इसके खिलाफ किसी ने कोई ऑब्जेक्शन नहीं किया था “। राष्ट्रीय शोध केंद्र के निदेशक विशाल नाथ, ने बताया की ये हमारे लिए एक बहुप्रतीक्ष और उत्साहवर्धक खबर थी ।

लिची एसोसिएशन ऑफ बिहार के अध्यक्ष बाचा प्रसाद सिंह ने कहा की मूल रूप से एप्लाइड टैग के लिए अप्लाई लिची एसोसिएशन ऑफ बिहार ने किया था ।

जीआई टैग से जुड़े तथ्य और इसके फायदे

  • जीआई टैग से लीची उत्पादकों को बेहतर कीमत मिलने से लेकर दूर दूर के बाजारों तक पहुंच प्रदान करने का लाभ मिलेगा
  • इससे दूरदराज के इलाकों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भरी लाभ होगा।
  • यह टैग 10 साल की अवधि के लिए मान्य है जिसके बाद इसे नवीनीकृत किया जा सकता है, जीआई को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के एक कानून द्वारा कवर किया गया है

बिहार के लिची ग्रोर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बिहार प्रसाद सिंह,ने कहा, “टैग, बंगाल, उत्तराखंड और पंजाब जैसे अन्य राज्यों के लिची उत्पादकों पर एक प्रभावी जांच करेगा,” श्री सिंह ने कहा, “अब बिहार लिची उत्पादकों को शाही लिची बाजार का एकमात्र अधिकार मिलेगा और इससे निश्चित रूप से उन्हें उनके उत्पाद के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। ”

अभी तक बिहार के कौन कौन से उत्पाद को जी आई टैग मिला है

इस टैग से सम्मानित बिहार के अन्य उत्पाद  है 

  • जर्डलु आम
  • कतरनी  चावल
  • मगही पान
  • मधुबनी पेंटिंग्स
  • भागलपुर सिल्क
  • सिक्की घास

आपको बता दे की दार्जिलिंग चाय 2004 के वर्ष में जीआई टैग प्राप्त करने वाला पहला उत्पाद था।

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