जब जगजीवन राम ने दलितों के साथ भेद भाव के खिलाफ आवाज उठाई थी

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जगजीवन राम को आज की पीढ़ी बहले ही काम जानती होंगी लेकिन दलितों के उठान और उनके पहले से बेहतर जीवन दी में उनका बहुत बड़ा योगदान है । जगजीवन राम भारत के प्रथम दलित उप-प्रधानमंत्री एवं राजनेता थे जिन्होंने दलितों के उठान के लिए बहुत से कार्य किये |

आज मैं आपको एक ऐसा वाक्य सुनाने जा रहा हूँ ,जो इस महान व्यक्ति की महानता की छोटी सी कहानी सुनाता है |

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दरअसल जगजीवन राम अपने पिता की समयपूर्व मौत पर जगजीवन और उनकी मां वसंती देवी को कठोर आर्थिक स्थिति में छोड़ दिया गया था। वह 1 9 20 में आरा में अग्रवाल मिडिल स्कूल में शामिल हो गए, जहां निर्देश का माध्यम पहली बार अंग्रेजी था, और 1 9 22 में आरा टाउन स्कूल में शामिल हो गया। यह यहां था कि वह पहली बार जाति भेदभाव का सामना कर रहा था, फिर भी वह अजीब रहा। इस स्कूल में अक्सर उद्धृत घटना हुई; स्कूल में दो पानी के बर्तन, एक हिंदुओं के लिए और दूसरा मुसलमानों के लिए एक परंपरा थी। जगजीवन ने हिंदू बर्तन से पानी पी लिया, और क्योंकि वह एक दलित वर्ग से थे , तो किसी ने मामले को प्रिंसिपल को बताया गया, जिसने स्कूल में “दलितों ” के लिए तीसरा पॉट रखवा दिया था।

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प्रिंसिपल के इस फैसले के खिलाफ उन्होंने विद्रोह कर दिया और तब तक वो लगातार वो इस घरे को फोड़ते रहे जब तक प्रिंसिपल ने तीसरे पॉट रखवाना बंद नहीं किया ।

ऐसी जीवट साहस से धनि थे जगजीवन राम

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